नाम : अब्दुर्रज्जाक उर्फ विलायत अली उर्फ दीवाना शाह
जन्म स्थान : डीसा, पालनपुर (गुजरात)
जन्म तारीख : 25 मोहर्रम, 1292 हिजरी, 4 मार्च 1875 ईसवीं बरोज जुम्मेरात (गुरुवार)
धर्म : इस्लाम (सुन्नी)
सिलसिला : चिश्ती, रफाई
पीरो मुर्शिद : हजरत महबूब अली शाह साहब चिश्ती र.अ. देवगढ़ जिला राजसमंद, हजरत उल्फत अली शाह साहब उर्फ कड़क अली शाह साहब रफाई र.अ. बड़नगर जिला उज्जैन एमपी
लक़ब : शहंशाहे ए मेवाड़ (बाबा हुजूर)
विसाल : 8 सफ़र 1363 हिजरी, 03 फरवरी, 1944 ईसवीं
स्थान : मोमिन मोहल्ला कपासन (मेवाड़)
दरगाह : स्टेशन रोड, दीवाना नगर- कपासन, जिला-चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)।
जीवनी : हजरत दीवाना शाह साहब का जन्म 25 मोहर्रम 1292 हिजरी, 4 मार्च, 1875 ईसवीं, जुमेरात (गुरुवार) सुबह सादिक महल्ला कुरैशियान में पिता हजरत अब्दुल कादिर साहब के घर जेनब बाई की कोख से कुरेशी खानदान में हुआ।
तालीम : आपने वहीं के मदरसे में उर्दू, अरबी, फारसी, गुजराती, हिंदी व अंग्रेजी की तालीम हासिल की।
परिवार : मरियम बी (बीवी), दो साहबजादे- एक का नाम मोहम्मद हुसैन था, दूसरे का बचपन में ही इंतकाल हो गया। आपकी हयात में ही मोहम्मद हुसैन का भी इंतकाल हो गया।
आध्यात्मिक गुरु (पीरो मुर्शिद) : चिश्ती सिलसिला, हजरत कुतुब अली शाह साहब र.अ. के साहबजादे हजरत महबूब अली शाह साहब र.अ. अली चिश्ती का मजार देवगढ़ जिला राजसमंद राजस्थान में हैं। हज़रत उल्फत अली शाह साहब र.अ. उर्फ हजरत कड़क व अली शाह साहब र.अ. का मजार अली सेठ का कब्रिस्तान बडनगर जिला उज्जैन मध्य प्रदेश में है।
विसाल : 8 सफ़र 1363 हिजरी, 03 फरवरी 1944 सुबह 3:30 बजे जुमेरात को मोमिन मोहल्ला कपासन स्थित आपकी कयाम गाह पर हुआ।
दरगाह शरीफ एक नज़र में :
दीवाना नगर कपासन में स्टेशन रोड पर 30 बीघा ज़मीन (6 एकड़) के विशाल आहते में मौजूद हैं जहां 70 फीट ऊंचा बुलंद दरवाजा बना हुआ हैं। 145x83 साइज़ का शाही महफ़िल खाना, परिधि का गुम्बद बना हुआ हैं, जिस पर छः फीट ऊंचा व परिधि का सोने का कलश लगा हुआ हैं। चांदी की जाली का कटघरा, आस्ताना में चांदी के 5 दरवाजे व दो खिड़की हैं। संभाग की सबसे बड़ी औलिया मस्जिद हैं। औरतों की इबातगाह के लिए आयशा मस्जिद बनी हुई है। छतरी नुमा होजे उल्फत, ठहरने के लिए पंखे, कूलर, एसी लगे 200 कमरें, नियाज व शादी विवाह के लिए आठ कमरे सहित 200x100 साइज़ का अहमद कबीर मंजिल, शिक्षा के लिए दीवाना शाह माध्यमिक विद्यालय, मदरसा दीवाना शाह हैं। दरगाह परिसर में ही लंगर खाना, एक साथ 14 क्विंटल खाना बना सके जितनी बड़ी देग हैं। आसेब जदा के लिए सहने अदालत हैं। दरगाह परिसर में ही महबूब पार्क हैं! हर चांद रात पर मेला ग्राउंड में 300 से ऊपर एवं अय्यामे उर्स में 600 से ऊपर दुकानें लगाई जाती हैं जिसमें डोलर, झूले, चकरी भी लगें जाते हैं। ढ़ाई लाख लीटर की ऊंची, 50-50 हजार लीटर की दो अंडर ग्राउंड पानी की टंकी बनी हुई हैं। दीवाना पार्क में बाबा हुजुर द्वारा खुदवाया गया कुआं भी मोजूद हैं।
दीवाना शाह साहब का सालाना उर्स मुबारक :
छः सफ़र सुबह हज़रत ख्वाज़ा गरीब नवाज र.अ. की छठी शरीफ की महफिल से शुरू होकर 8 सफ़र को जोहर की अजान से पहले कुल की फ़ातेहा होती हैं।